Maine Ulta Dimaag lagaya (Hindi story)

एक बार की बात है।हम तीन लोग लनदनपुर मे एक ही मोटरसाईकिल पे सवार थे।चला तो मैं ही रहा था। थोड़ी दूर बाद जब आगे देखा तो हक्का बक्का रह गया। आगे पुलिस, गाड़ी के लाइसेंस की चेकिंग कर रही थी। एक तो हम लोगो के पास लाइसेंस नहीं था और ऊपर से गाड़ी पे एक सवारी ज्यादा। बात गम्भीर थी। अब मैंने अपना उल्टा दिमाग लगाया । इससे पहले कि मोटरसाईकिल पुलिस वाला रोकता , मैंने खुद ही उसके पास ले जाकर रोक दी, और कहा कि आप रशींद बनाइये।पुलिस मेन की कन्डीशन खराब।उसकी जिन्दगी का ये पहला केस था जिसमे किसी ने बिना बोले ही गाड़ी रोक दी।मैंने हालात को समझते हुये फिर से हाथ दिखाया और कहा कि रशीद बनाइये आप.
वो बोले ''आप बात तो कीजिये"। मैंने कहा "कोई बात नहीं करनी , आप मेरे टाइम की कीमत नहीं पहचान रहे हैं , मुझे आपसे कोई बात नहीं करनी , आप बस रसीद बनाइये।"पुलिस मेन बोला कि मैं हेड साब को बुला कर लाता हूँ । हेड साब के पास जाकर उसने सारा माजरा समझाया । हेड साब भी थोड़े दर गए। वो मेरी सूरत दूर से ही गौर से देखने लगे। उनके मन मे तरह तरह के ख़्याल आते। कभी मैं उन्हें लालूजी का चचेरा नजर आता तो कभी नरेन्द्र मोदी जी का सगा। वो पुलिस मेन से बोले "गोकुल , कैसे भी करके इनको बह्गा, पैसे मत लेना , नईं ते अपनी नौकरी गयी । मुझे तो ये कोई ऊचा आदमी लगता है ।"
फिर क्या था । पुलिस मेन हमारे पास आया और बोला "साब आप जाइए प्लीस "। और हम शांति से वापस आ गए।

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